मामौर झील से एक हजार बीघा फसल जलमग्न
March 8, 2020 • MOHD. IQBAL HASAN


- दो दिन की बारिश से ओवरफ्लो हुई झील, किसानों की बढ़ी मुश्किलें

कैराना। दो दिन तक बारिश के चलते मामौर झील एक बार फिर ओवरफ्लो हो गई। मेड़बंदी को तोड़ते हुए झील का पानी किसानों के खेतों में घुस गया। इसमें किसानों की करीब एक हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई है। फसलों की बर्बादी के चलते किसान बेहद चिंतित है। किसानों ने प्रशासन को अवगत कराते हुए मुआवजे की मांग की है। वहीं, किसानों द्वारा जेसीबी मशीन लगवाकर मेड़बंदी कराते हुए पानी की रोकथाम कराई जा रही है।
   गांव मामौर में स्थित झील में कैराना की निकासी का गंदा पानी समाता है। पिछले दो दिनों तक बेमौसम हुई बारिश के चलते झील में पानी का दबाव बढ़ गया। शुक्रवार देर रात अत्याधिक पानी के कारण किसानों की ओर से की गई मेड़बंदी टूट गई, जिसके बाद झील का पानी किसानों के खेतों में घुस गया। झील के ओवरफ्लो होने के कारण आधा दर्जन से अधिक किसानों की गन्ना, गोभी, करेला, गेहूं आदि की फसल जलमग्न हो गई। इसके बाद मौके पर किसान जमा हो गए। किसानों ने बाकी फसलों की बर्बादी रोकने के लिए जेसीबी मशीन को मौके पर बुलवाया। जहां किसानों द्वारा झील के पानी से बची शेष फसल बर्बाद न हों, इसके लिए मेड़बंदी कराई जा रही है और पानी की रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। उधर, किसानों की ओर से स्थानीय प्रशासन को झील के ओवरफ्लो होने के बारे में जानकारी दे दी गई है। किसानों ने प्रशासन से नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की गुहार लगाई है।
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किसका कितना हुआ नुकसान
करता राम- 150 बीघा
कलीराम, तेलूराम- 150 बीघा
राजबीर- 150 बीघा
हरिकिशन, शरद, शशि, हरपाल- 150 बीघा
रामकुमार, शिवकुमार, अमित, सुमित, विकास- 200 बीघा
ओमपाल, संजय, तेजपाल, पंकज- 150 बीघा
ओमकार, राजकुमार, हंसकुमार- 150 बीघा
महमूद, हारून, सादा- 30 बीघा
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हर साल बर्बाद होती हैं फसलें
झील के ओवरफ्लो होने का मुख्य कारण कैराना की निकासी का गंदा पानी है, जिससे आए साल झील बरसात में ओवरफ्लो हो जाती है। कई बार किसान झील से निजात दिलाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक स्थायी हल नहीं निकल पा रहा है।
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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं बना
किसानों की बर्बादी को देखते हुए मामौर झील पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की कवायद शुरू की गई थी। इसके लिए झील पर नमामि गंगे के ज्वाइंट सेक्रेट्री भी जायजा लेने के लिए पहुंचे थे। लेकिन, आजतक यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन पाया है।
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संसद में भी गूंजा झील का मुद्दा
दिवंगत सांसद बाबू हुकुम सिंह ने मामौर झील का मुद्दा संसद सत्र के दौरान उठाया था। उन्होंने किसानों की आए साल बर्बादी का जिक्र करते हुए झील से स्थायी निजात दिलाने की मांग की थी। उनकी मंशा यह भी थी कि झील को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित कराया जाए। हुकुम सिंह के निधन के बाद से ही झील का मुद्दा ठंडे बस्ते में नजर आता है।