नागरिकता संशोधन बिल: कैराना में मुस्लिमों ने इस तरह जताया विरोध, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा
December 13, 2019 • MOHD. IQBAL HASAN


शामली: कैराना में नागरिकता संशोधन बिल पर मुस्लिम समाज के लोग खफा हैं। मुस्लिमों ने जुमे की नमाज के बाद काली पट्टी बांधकर कड़ा विरोध किया। जमीयम उलमा-ए-हिंद के पदाधिकारियों ने बिल को धर्म के आधार पर भेदभाव वाला बताया है। उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति के नाम छह सूत्रीय ज्ञापन पत्र सौंपा है।
   शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद सैकड़ों मुस्लिम समाज के लोग जामा मस्जिद के ​गेट पर एकत्र हुए। जहां उन्होंने नागरिकता संशोधन बिल का काली पट्टी बांधकर कड़ा विरोध जताया। इसके बाद जामा मस्जिद के शाही इमाम व जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना ताहिर हसन के नेतृत्व में कोतवाली प्रभारी को महामहिम राष्ट्रपति के नाम आठ सूत्रीय ज्ञापन पत्र सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि नागरिकता संशोधन विधेयक प्रत्यक्ष: सांप्रदायिकता से प्रेरित है। विधेयक का उद्देश्य तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से आने वाले उत्पीडित अल्पसंख्यक शरणा​र्थियों को नागरिकता देना बताया गया है, लेकिन यह विधेयक धर्म के आधर पर उनमें भेदभाव करता है। धर्म के आधार पर नागरिकता को विभाजित करने की मंशा स्पष्ट प्रतीत होती है, इस तरह यह देश को बहुलवादी ताने-बाने का उल्लंघन करता है। हमारे देश का चित्र जो हमारे स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र के निर्माताओं के विचारों तथा हमारे संविधान में निहित उसूलों से निकला है, वह एक ऐसे देश का है, जो सभी धर्मों के लोगों के साथ समान व्यवहार करने पर वचनबद्ध है। उक्त बिल में नागरिकता के लिए एक मानदंड के रूप में धर्म का उपयोग देश के इस ​इतिहास में विराम को चिह्नित करेगा, जोकि कट्टरपंथ पर आधारित है। यह विराम संविधान की मूलभावना और संचरना के साथ असंगत होगा। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में हर व्यक्ति को कानून के सामने समानता दी गई है और राज्य को किसी भी व्यक्ति के प्रति उसके धर्म, जाति या पंथ के आधार पर कानून के सामने भेदभाव करने से रोका गया है। ऐसा करना समानता के मूल सिद्धांत के विरूद्ध है। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित यह विधेयक संविधान की भावना और इसकी मूल संचरना का उल्लंघन करता है। यह बिल असम समझौते 1985 का भी उल्लंघन करता है, जो असम में अवैध रूप से आ बसने वाले विदेशियों का पता लगाने के लिए कट-आॅफ तारीख के रूप में 25 मार्च 1971 तय करता है। इस प्रकार मनमाने ढंग से इस समझौते की अनदेखी से उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में शांतिपूर्ण माहौल में खलल पड़ रहा है। हम इस संवैधानिक और अमानवीय बिल को अस्वीकर करते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि वह लोगों के साथ अन्याय और सांप्रदायिकता के लक्ष्य को रोकने के लिए अपने गरिमापूर्ण पद के प्रभाव का उपयोग करें। इस दौरान जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना तहसीन, नगर अध्यक्ष मौलाना उमर, जमीयत यूथ क्लब से स्काउट मास्टर मौलाना इरफान कासमी, कोषाध्यक्ष मौलाना इमरान आदि मौजूद रहे।

पावटीकलां-गोगवान में की गई नारेबाजी
क्षेत्र के ग्राम पावटीकलां और गोगवान के ग्रामीण भी जुमे की नमाज के बाद गांव में एकत्र हुए, जहां उनके द्वारा नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया गया। इस दौरान ग्रामीण हाथों में तख्तियां और जमीयत उलमा-ए-हिंद के झंडे लिए हुए थे। ग्रामीणों ने बिल का विरोध करते हुए जमीयम उलमा-ए-हिंद जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इस दौरान मौलाना मुबारिक, मौलाना तालिब, मौलाना आरिफ, भाकियू गोगवान ग्राम अध्यक्ष आमिर अली, मौलाना राशिद, हाफिज महबूब, याकूब, डा. महताब, आजम, सादिक, वकील आदि मौजूद रहे।

रात में जामा मस्जिद के इमाम से मिले एसपी
गुरूवार देर एसपी विनीत जयसवाल कैराना कोतवाली पहुंचे। जहां पर उन्होंने जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना ताहिर हसन से बातचीत की। एसपी ने उन्हें कहा कि शांति व्यवस्था बरकरार रखने के लिए धारा 144 लागू है, इसलिए धरना-प्रदर्शन की कतई इजाजत नहीं दी गई है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन का सहयोग करने को भी कहा।


चाक-चौबंद व्यवस्था, डीएम-एसपी का डेरा
हाल ही में देवबंद में नागरिकता संशोधन बिल के विरोध के दौरान हुए बवाल की घटना को देखते हुए कैराना में चाक-चौबंद व्यवस्था की गई। मस्जिदों के आसपास पुलिस को तैनात किया गया था। मस्जिद मस्जिद के पास ब्लैक कैट कमांडो भी तैनात रहे। एसडीएम डा. अमित पाल शर्मा व सीओ प्रदीप सिंह लगातार क्षेत्र में फ्लैगमार्च करते नजर आए। वहीं, डीएम अखिलेश सिंह व एसपी विनीत जयसवाल ने कोतवाली में डेरा डाल लिया। वह पल-पल की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए थे।