नई शिक्षा नीति से परिचय पर आधारित वेबिनार आयोजित
September 5, 2020 • MOHD. IQBAL HASAN


 कैराना। शिक्षक दिवस के अवसर पर जनपद शामली में नई शिक्षा नीति से परिचय पर आधारित एक वेबीनार आयोजित की गई इस वेबिनार का आयोजन प्रदेश के उत्कृष्ट शिक्षकों के लिए बने मिशन शिक्षण संवाद समूह की शामली टीम द्वारा किया गया। वेबीनार में मुख्य अतिथि प्रदेश के राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) वाचस्पति मिश्रा रहे जो कि नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा जी की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स के सदस्य हैं। मुख्य वक्ताओं में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई के प्रोफेसर डॉ संजीव राय, भगवान परशुराम इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर अभिषेक स्वरूप,सरकारी स्कूल डॉट इन के संस्थापक अभिषेक रंजन,डायट मुजफ्फरनगर की वरिष्ठ अधिवक्ता सरोज तोमर व प्रवक्ता महेंद्र अधिकारी,प्रदेश कोर टीम से वरिष्ठ सहयोगी अवनींद्र जादौन रहे।


     शनिवार को आयोजित वेबीनार मे मुख्य अतिथि वाचस्पति मिश्रा ने नई शिक्षा नीति का परिचय देते हुए बताया कि पहले हमारे देश में लॉर्ड मेकाले की नीतियों पर आधारित शिक्षा प्रणाली लागू थी। देश की आजादी के बाद शिक्षा में सुधार तो हुआ लेकिन अब नई शिक्षा नीति में हमने मातृभाषा में पढ़ाई और प्राचीन भारत में प्रचलित शिल्प कला को प्रमुख स्थान दिया।उन्होंने कहा कि जिन देशों की जीडीपी अच्छी है अर्थात  विकसित देशों में अपनी मातृभाषा में पढ़ाई होती है। इसलिए हमने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाया है।
         उन्होंने संस्कृत में कार्यशाला कराने का भी निमंत्रण दिया। डॉक्टर संजीव राय ने कहा कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने शिक्षा पर प्रभाव पड़ता है।उन्होंने कहा कि हमें इस कार्य में जो मान सम्मान मिलता है वह हमारे मूल कार्य बच्चों को पढ़ाने के लिए मिलता है। बच्चे स्कूल हमारा इंतजार करते हैं इसलिए हमें अन्य कार्यों को छोड़कर शिक्षण कार्य को मेहनत लगन के साथ करना चाहिए।
      डायट की वरिष्ठ प्रवक्ता सरोज तोमर ने कहा कि नई शिक्षा नीति में फाउंडेशन सबसे महत्वपूर्ण है जिसको हम तैयार करते हैं।उन्होंने कहा कि शिक्षक हरफनमौला होता है और सरकारी स्कूल में अध्यापक ज्ञान की क्रीम होता है।डायट प्रवक्ता महेंद्र अधिकारी ने कहा कि शिक्षा में दो चीजें होती हैं, फैसिलिटी और फैकल्टी उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने फैसिलिटी सुविधाएं भी दी हैं और हमारे सरकारी स्कूलों में फेकल्टी सबसे अच्छी होती हैं।उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश देश के अंदर शिक्षा के क्षेत्र में रोल मॉडल बनने की ओर अग्रसर है। सरकारी स्कूल डॉट इन के संस्थापक शिक्षकों का एकमात्र उद्देश्य और केंद्र बिंदु केवल बच्चा होता है उन्होंने अपने भ्रमण के दौरान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि टीम वर्क से यह काम बेहतर हुआ है।
        मिशन शिक्षण संवाद के संस्थापक विमल से मुलाकात के दौरान उन्होंने पाया कि शिक्षक को समाज के बीच में जाना चाहिए। सरकारी स्कूल के अध्यापकों की प्रशंसा करते उन्होंने कहा कि 'सरकारी है सबसे असरकारी'। इसके अतिरिक्त विभिन्न जनपदों से एडमिन मुजफ्फरनगर से अर्चना व अखलाक अहमद, गाजियाबाद से नीरव शर्मा,बुलंदशहर से शिल्पी गोयल,बागपत से रेनू देवी,शामली टीम की ओर से साजिद अहमद, रश्मि वर्मा, सुवासिनी चौहान ने अपने विचार प्रस्तुत किए साथ ही उपमा शर्मा जिनको इस वर्ष के राज्य अध्यापक पुरस्कार चयनित किया गया है तथा अंजली कुमारी ने शिक्षा पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत की।
     कार्यक्रम का कुशल संचालन मौ० यामीन, डॉ० अनुज राठी और अजय तोमर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया कार्यक्रम में 133 उत्कृष्ट शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।इस कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मान ई-सर्टिफिकेट के रूप में सम्मान पत्र देकर उनका सम्मान किया गया।